महाप्रलय से बचने का अचूक उपाय
कलंकी उदय हेले से जगुसधर, से हरी जे लीला र निमंते अवतार | परम पदार्थ से महिमा महामेरु, ता नाम धरिले संसार सागरु तरु || कल्कि भगवान् जब उदय होंगे धरती पर तो अपनी लीला-खेल रचेंगे | जैसे भगवान् द्वापर में, त्रेता में मानव के रूप में आकर अपनी ल…
कलंकी उदय हेले से जगुसधर, से हरी जे लीला र निमंते अवतार |
परम पदार्थ से महिमा महामेरु, ता नाम धरिले संसार सागरु तरु ||
कल्कि भगवान् जब उदय होंगे धरती पर तो अपनी लीला-खेल रचेंगे | जैसे भगवान् द्वापर में, त्रेता में मानव के रूप में आकर अपनी लीला-खेल करते थे, वैसे ही कलियुग के अंत समय पर जब भगवान् कल्कि मानव के रूप में उदय होंगे तब अपनी लीला-खेल करेंगे |
अर्थात-
कल्कि भगवान् जब मानव रूप में आयेंगे तब उनका स्थुलाचार में जो नाम होगा - जैसे द्वापरयुग में प्रभु का नाम श्री कृष्ण था, त्रेतायुग में प्रभु का नाम श्री राम था, तभी से अब तक राम और कृष्ण नाम जपकर भक्त भवसागर से पार होते आये है - वैसे ही जब कल्कि अवतार में प्रभु मानव रूप में धरती पे आके लीला-खेल करेंगे तब उनका मानव शरीर में लौकिक आचार में जो नाम होगा वही नाम एकमात्र भवसागर से पार होने का माध्यम होगा | वही नाम का जाप, भजन, कीर्तन करके भवसागर से पार होने का एकमात्र विकल्प होगा |
इसी लिए यहाँ पर लिखा गया है की "परम पदार्थ से महिमा महामेरु, ता नाम धरिले संसार सागरु तरु"
अर्थात-
संसार सागर से पार होने के लिए हमें कल्कि भगवान् के स्थुलाचार का जो नाम होगा वही जपना पड़ेगा | वही नाम परम पदार्थ होगा और महिमा का मेरु (पहाड़) होगा |
भविष्य मालिका के अनुसार कल्कि भगवान् माधव नाम से अवतरित हुए है और इसी लिए कलियुग के अंत में केवल और केवल माधव नाम ही काम आएगा | ये स्वयं निराकार परमात्मा का विधान है |
जय जगन्नाथ

