शास्त्रों में सत्य, त्रेता, द्वापर और कलियुग चार युगों का वर्णन है। भगवान महाविष्णु ने उपरोक्त चार युगों में 24 अवतार लिए हैं और उन अवतारों के नाम नीचे दिखाए गए हैं: कुमार अवतार (सनक, सनन्द…
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श्रीमद्भागवत महापुराण अन्य ग्रंथों की तरह वेद व्यास जी ने श्रीमद्भागवत भी लिखी। वेद व्यास जी को नारद जी से दिव्य ग्रंथ 'श्रीमद्भागवत महापुराण' लिखने और रचना करने की प्रेरणा मिली थी। श्रीमद्…
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के कारण इसका नाम वज्र रखा गया। सत्व, रज और तम तीनों गुणों से परे होने के कारण, परमेश्वर सर्वव्यापी है, इसलिए उसे 'वज्र' कहा जाता है। वह शाश्वत, आनंदमय और शुद्ध चेतना का स्वरूप है
उनकी श्री राधा और भगवान कृष्ण की सेवा करने की बहुत इच्छा और भक्ति थी
हमें बताओ क्या? ज्ञान के साधन क्या हैं और इसमें कितने श्लोक हैं? इसे सुनने का सही, सही तरीका क्या है? और वक्ता और श्रोता के क्या लक्षण हैं अर्थात् वक्ता और श्रोता कैसा होना चाहिए? सूत जी ने…
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श्री सूत जी कहते हैं- सृष्टि की रचना के आरंभ में भगवान ने भिन्न-भिन्न लोकों की रचना करनी चाही। इच्छा होते ही उन्होंने महतत्त्व तथा अन्य दिव्य गुणों से युक्त पुरुष का रूप धारण कर लिया। उस रू…
है कि पंचसखाओं में से श्री यशोबंत दास जी महाराज आगम निगम के संबंध में सभी बातों को जानने में समर्थ थे। महापुरुष शिशु अनंत दास जी महाराज सांकेतिक गणित के माध्यम से भविष्य जानने में समर्थ थे।…
- जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म या अधर्म की वृद्धि होती है तब-तब मैं (भगवान श्री विष्णु) स्वयं प्रकट होता हूं। धर्मात्मा भक्तों की रक्षा करने, दुष्टों और दुष्टों का नाश करने और धर्म क…
सत्ययुग में भगवन विष्णु ने अवतार ले के संसार में सत्य, शांति, दया, क्षमा और मैत्री की स्थापन की थी । उस समय सभी शास्त्रों के ज्ञाता थे और सभी वैदिक परम्परा के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे थे। …
यह है कि संबल ग्राम के प्रमुख ब्राह्मण के घर में, जहां भगवान विष्णु का नित्य यश गान किया जा रहा होगा, उसी घर में भगवान कल्कि का जन्म होगा। लेकिन बाद में जब द्वापर युग के अंत में भगवान वेदव्…
परम भगवान नारायण (भक्तों की जीवन शक्ति), कलियुग के दौरान तीन बार अवतार लेंगे। कलियुग के प्रथम अवतार - भगवान बुद्ध श्री जयदेव गोस्वामी (भगवान कृष्ण के प्रबल भक्त और 12वीं सदी के संस्कृत कवि)…
कलियुग का अंत हो चुका है। शास्त्रीय धारा एवं मनुस्मृति के आधार पर विशेष रूप से चार युग ही होते है। उन युगों के नाम हैं- पहला सतयुग, दूसरा त्रेतायुग, तीसरा द्वापरयुग और चौथा कलियुग है। इन चा…
कलियुग की चतुर्युग गणना के अनुसार 4,32,000 वर्ष भोग होना चाहिए। परंतु मनुष्य कृत पाप कर्मों की कारण, कलि युग की आयु का क्षय होता है। इस कलियुग की आयु भविष्य मालिका ग्रंथ के अनुसार जिन 35 प्…
उपरोक्त पंक्तियाँ यह है कि जब भगवान नीलांचल से प्रस्थान करेंगे तो भक्तों को एक संकेत मिलेगा जिसे देखकर ही वे विश्वास करेंगे। तब भगवान श्री कृष्ण कह रहे हैं:
इस वीडियो में पंडित श्री काशीनाथ जी ने भविष्य मालिका में वर्णित कल्कि भगवान के अवतरण का वर्णन किया है, मालिका की पवित्र वाणी सिर्फ भक्तों के लिए है, सभी पञ्चसखाओं ने भविष्य मालिका में ओडिशा…
